SESSION: 07th January, 2026 {SATSANG}
- Narayan Reiki Satsang Parivar Team

- Jan 7
- 8 min read
Updated: Jan 14

|| नारायण नारायण ||
7th January 2025 बुधवार सत्संग का सारांश । सत्संग आपके लिए राज दीदी के दैविक सत्संग के खजाने से लाया गया है।
राज दीदी ने इस सत्र में श्रीमती लता खरे के माध्यम से कहा। लता खरे महाराष्ट्र के बुलढाणा जिले के छोटे से गांव में रहने वाली 65 वर्षीय महिला है। उन्होंने आजीवन मेहनत का कमाया, बचाया और तीन बेटियों की शादी बहुत अच्छे से की। इस उम्र में भी दोनों पति-पत्नी एक जमींदार के खेत में काम करते हैं। जो कुछ मिल जाता, उसी में खुशी-खुशी गुजर बसर कर रहे थे। उन दोनों में गहरा प्रेम था।
एक दिन दोनों खेत में काम करके वापस लौट रहे थे, रास्ते में अचानक उनके पति की तबीयत खराब हो गई। जैसे-तैसे लता उन्हें घर पर लेकर आई और घरेलू उपचार किया लेकिन उपचार का असर नहीं दिख रहा था, इसलिए नजदीकी डॉक्टर के पास ले गई। डॉक्टर ने कहा, इन्हें तो बड़े अस्पताल लेकर जाना होगा। बड़े अस्पताल का नाम सुनकर लता घबरा गई क्योंकि उसके पास पैसे नहीं थे। पति से बेहद प्रेम था तो अपना स्वाभिमान परे धरके अपने परिचितों से पैसा जमा करके लेकर आयी। पति को बड़े अस्पताल ले जाकर जांच करवाया। लता ने जो भी पैसे इकट्ठे किए थे वह सारे पैसे पति के इलाज में खर्च हो गए थे। लता के पास शाम तक इतने पैसे भी नहीं बचे थे कि अस्पताल की कैंटीन में बैठकर भरपेट भोजन कर सके। वहां से निकले और बस स्टॉप के पास पहुंचे, वहीं पर एक समोसा बेचने वाला बैठा था, दोनों ने समोसे खाए। समोसे वाले ने न्यूजपेपर में लपेटकर समोसे दिए थे। लता समोसे पर चटनी लगाकर खा रही थी, उतने में उनकी नजर न्यूज़पेपर में मोटे-मोटे अक्षरों में लिखे हुए हैडलाइंस पर गई। उसमें "बारामती मैराथन पुरस्कार राशि" के बारे में लिखा था। यह देखते ही लता ने भीतर ही भीतर उस राशि को पाने का ठान लिया। यह 65 वर्षीय महिला दौड़ने वालों की टीम में शामिल हो गई। हालांकि ऑर्गेनाइजर्स उसे परमिशन नहीं दे रहे थे। उनका कहना था कि पति की जान बचाने के चक्कर में उनकी जान न चली जाए। लेकिन जब वह नहीं मानी तो आयोजकों ने उन्हें भी बैच लगा दिया। दौड़ शुरू होते ही पब्लिक लता को देखकर हंस रही थी और उसका मजाक उड़ा रही थी लेकिन वह उन सबसे बेखबर अपने पति के प्रेम में दीवानी दौड़ती चली जा रही थी। आश्चर्यजनक दृश्य था, एक बुजुर्ग महिला आगे आगे दौड़ रही है और यंग जनरेशन पीछे पीछे दौड़ रही है। लता पसीने से लथपथ थी, समापन रेखा के पास पहुंच गई और जीत गई। जीत का डंका बज रहा था, यह सब बातों को अनदेखा कर उसने तो बस अपनी जीत की राशि ली, घर गई, पति को लेकर अस्पताल गई और इलाज शुरू करवाया। उसके बाद खुद के पैरों का इलाज किया और अगले 2 सालों तक वह विजेता बनी रही। इस 65 वर्षीय महिला की कहानी से आप प्रेम की ताकत को समझिए। उस वक्त उन्हें जरूर याद रखा गया पर धीरे-धीरे उन्हें भुला दिया गया, लेकिन लता खरे ने एक इतिहास रच दिया। लोग आज भी उनका एग्जांपल देते हैं, पुस्तकों में उनका वर्णन आता है और आप तो जानते ही है की पुस्तकें अमर होती है। जितनी बार वह पुस्तक पढ़ी जाएगी उतनी बार उनका नाम पढ़ा जाएगा और लता खरे का नाम जीवंत हो जाएगा।
जिनके प्रति वह दीवानी थी, जिनके लिए वह दौड़ी थी, उस प्रेम के एवज में लता खरे को अच्छा नेम, फेम, मनी मिला।
प्रेम के बाबत नारायण शास्त्र कहता है कि आपसी संबंध घनिष्ठ और मजबूत होंगे तभी ही आपका जीवन खुशहाल हो पाएगा। प्रेम, प्रीत, प्यार में सभी ढाई अक्षर के छोटे से शब्द है लेकिन अपने भीतर असीम ऊर्जा, असीम शक्ति, असीम सामर्थ्य समेटे हुए है। इसी का रूप है लव, रिस्पेक्ट, फेथ, केयर, कद्र करना, माफी मांगना, माफ कर देना, प्रशंसा करना, उपहारों का लेनदेन, शांत हो जाना, प्रेम से समझा देना, आदि। यह सभी वह चीजें है जो आपसी संबंधों को मजबूती प्रदान करती है, जो प्रेम का ही एक रूप है।
नफ़रत, अविश्वास, लापरवाही, कद्र ना करना, अनदेखा करना, क्रोध करना, ईर्ष्या, द्वेष, ईगो, शिकायत करना, निंदा करना, झूठ बोलना, गलत शब्दों का उच्चारण करना, दोषारोपण करना इन सभी के कारण आपसी संबंधों में दूरियां पैदा होती है। यह दोनों ही ऊर्जा है - एक सकारात्मक ऊर्जा है और दूसरी नकारात्मक ऊर्जा है। दोनों में यह समानता है कि आप जिसका भी प्रयोग करेंगे वही ऊर्जा आपके भीतर बढ़ेगी। नकारात्मक ऊर्जा कई गुना होकर बढ़ जाती है, सकारात्मक ऊर्जा की स्पीड थोड़ी सी कम है। सकारात्मक चीजें वह है जो हम अपने जीवन में हासिल करना चाहते हैं, इसकी खासियत यह है कि यह जितना अधिक हमारे जीवन में बढ़ता जाता है उतनी अधिक हमारी कामना और चाहना बढ़ती जाती है। यह चीज हमारी वाणी, स्वभाव, और व्यवहार का हिस्सा है, इन्हीं के माध्यम से हम इनका उपयोग करते हैं। जब हम वाणी, स्वभाव और व्यवहार से सकारात्मक होते हैं तो हमारे भीतर विनम्रता का भाव होता है, यह चीज हम निरंतर पाना चाहते हैं। जब हम वाणी, स्वभाव और व्यवहार से नकारात्मक होते हैं तो हमारे भीतर कठोरता का भाव आता है।
नारायण शास्त्र कहता है कि सकारात्मकता दूसरों को देने की चीजें है। यदि आपको यही चीज चाहिए तो एक मात्र उपाय यह है कि जितनी सकारात्मकता आप दूसरों को देते चले जाएंगे वह कई गुना होकर आपको मिलती चली जाएगी।
ऐज पर नारायण शास्त्र, यह चीज हमारे शरीर में पहले से ही अवस्थित है। हमारे भीतर जो अवस्थित ऊर्जा है वह साइलेंट मोड पर है, एक्टिव नहीं है। जैसे ही आप सकारात्मक तरीके से व्यवहार करते हैं वैसे ही आपके भीतर सकारात्मकता बढ़ती चली जाती है और नकारात्मकता साइलेंट मोड पर ही रहती है। यही ऊर्जा हमारे शरीर के बाहर भी निकलती है और हमारी पूरी ओरा में समाहित हो जाती है। इस ऊर्जा के भीतर गजब की आकर्षण शक्ति है, इससे आपकी रोग प्रतिरोधक शक्ति बढ़ती है, आपके काम आसानी से और सरलता से होते चले जाते हैं। यह आकर्षित करती है सुख, शांति, सेहत, समृद्धि को। सबसे पहले यह आपके चेहरे पर मुस्कान लाती है और आपको और अधिक सुंदर बनाती जाती है। यह आपके जीवन में उन्नति, प्रगति, सफलता, खुशी, आनंद, उत्साह, नेम, फेम, मनी को आकर्षित करती हैं।
सपोज नकारात्मक ऊर्जा जो आपके भीतर साइलेंट मोड पर है और आपने किसी भी प्रकार का नकारात्मक व्यवहार किया तो यह नकारात्मक ऊर्जा एक्टिवेट हो जाती है और आपके शरीर के बाहर की पूरी ओरा को घेर लेती है। इसके भीतर भी गजब की आकर्षण शक्ति है। नकारात्मक ऊर्जा सबसे पहले आपकी रोग प्रतिरोधक क्षमता को कमजोर कर देती है, आपके काम होते-होते रुक जाते हैं, दुख, दरिद्रता, अशांति, रोग, शोक, पतन, कष्ट, पीड़ा, तकलीफें, परेशानियां, समस्याएं, आदि इन्हें अपनी ओर आकर्षित करती है।
अगर आप नकारात्मकता भरा जीवन जी रहे हैं तो जरा नकारात्मकता की लिस्ट को चेक कर लीजिएगा, निश्चित है उस लिस्ट में से आप ऐसा कोई ना कोई व्यवहार कर रहे होंगे जिसकी वजह से आप यह नकारात्मक चीजें अपने जीवन में आकर्षित कर रहे हैं।
आपका पेट जरा सा अस्वस्थ होता है तो आप यह चेक कर लेते है कि मैंने कल क्या खाया था जिसका असर आज हो रहा है तो आप झट कह देते हैं कि वह चीजें मुझे सूट नहीं होती है, अगली बार से मुझे वह नहीं खाना है। आपको नकारात्मकता को छोड़ना होगा, तभी ही आप अपने जीवन में सकारात्मकता को हासिल कर पाएंगे।
हमें यह अच्छे से समझ लेना होगा कि हमारी वाणी, स्वभाव और व्यवहार वह इंस्ट्रूमेंट है जिनके माध्यम से हम सकारात्मकता और नकारात्मकता का प्रयोग करते हैं। वाणी, स्वभाव और व्यवहार में असीम शक्ति है जो हमारी जन्म कुंडली को बदलने की क्षमता रखती है।
सपोज आपकी जन्मकुंडली मैं ऐसा लिखा हुआ है कि आप दुख, दरिद्रता, अशांति से भरा हुआ जीवन जीने वाले हैं, लेकिन आपकी वाणी, स्वभाव और व्यवहार में आप सकारात्मक शब्दों का प्रयोग करते हैं तो आपके जीवन में सकारात्मकता शामिल हो जाएगी। यदि आपके जीवन में सातों सुख लिखे हुए हैं लेकिन आपका स्वभाव, वाणी, व्यवहार नकारात्मकता से भरा हुआ है तो सकारात्मक चीज आपके जीवन से निकल जाएगी और आप नकारात्मकता को आपके जीवन में आकर्षित कर लेंगे।
राज दीदी ने आगे कहा कि लव, रिस्पेक्ट, फेथ, केयर यह शब्द दिखने में बहुत छोटे-छोटे लगते हैं लेकिन अपने भीतर असीम ऊर्जा समेटे हुए हैं। एक एक शब्द शक्ति, सामर्थ्य, प्रचुरता से भरा हुआ है। जैसे-जैसे आप इन चीजों को अपनी वाणी और स्वभाव में ढालेंगे वैसे-वैसे यह चीजें अपनी प्रचुरता आपको देना शुरू कर देंगे। माफ करना या माफी मांगना। "माफ" छोटा सा शब्द है लेकिन अपने भीतर इतिहास रचने की सामर्थ्य रखता है।
मुख्य शब्द : लव, सराहना, सकारात्मक ऊर्जा, नकारात्मक ऊर्जा।
नारायण धन्यवाद
राज दीदी धन्यवाद
सादर सप्रेम सहित
स्वाति जोशी 🙏🙏
मलाड, मुंबई

|| Narayan Narayan ||
The summary of Wednesday Satsang – 7th January 2026. This Satsang is brought to you from the divine treasure of Raj Didi’s spiritual discourses.
Through Mrs. Lata Khare, Raj Didi narrated an inspiring true story. Lata Khare is a 65-year-old woman living in a small village in Buldhana district of Maharashtra. Throughout her life, she worked hard, saved money, and married off her three daughters respectfully. Even at this age, she and her husband worked as farm laborers on a landlord’s field and lived contentedly with whatever they earned. Their relationship was filled with deep love and affection.
One day, while returning from work, Lata’s husband suddenly fell seriously ill. She somehow brought him home and tried home remedies, but when there was no improvement, she took him to a nearby doctor. The doctor advised immediate treatment at a big hospital. Hearing this, Lata panicked as she had no money. Out of deep love for her husband, she set aside her self-respect and borrowed money from acquaintances
She took her husband to a big hospital, but all the collected money was spent on tests. By evening, she didn’t even have enough money to eat properly. Near a bus stop, they bought a few samosas wrapped in a newspaper. While eating, Lata noticed a bold headline mentioning a Baramati marathon prize.
At that moment, she made a firm decision. This 65-year-old woman joined the marathon runners. The organizers initially refused, fearing for her safety, but she insisted. Finally, she was given a participant badge.
As the race began, people laughed at her and mocked her, but she remained completely absorbed in her love for her husband. It was a surprising sight—an elderly woman running ahead while the younger generation followed behind. Sweating heavily, Lata reached the finish line and won the race.
Ignoring the applause and fame, she took the prize money, went home, admitted her husband to the hospital, and began his treatment. Later, she also treated her own injured legs. For the next two years, she continued to win the marathon.
Through this story, understand the power of love. Many people have run marathons before and after, but they were gradually forgotten. Lata Khare created history. Even today, her example is quoted, written in books—and books are immortal. Every time they are read, her name lives on.
Isn’t it true that for her deep love and devotion toward her husband, she received name, fame, and money in return? Teachings on love and energy (according to Narayan shastra)
Narayan Shastra says that only strong and loving relationships can make life truly happy.
Love is a small word of just two and a half letters, but it holds infinite energy and power. Love appears in many forms: Love, respect, faith, care, appreciation, forgiveness, Asking for forgiveness, forgiving others, praise, gift-giving, calmness, understanding through love
These strengthen relationships and are all forms of love.
On the other hand, negativity—such as hatred, distrust, neglect, anger, jealousy, ego, complaints, criticism, lies, harsh words, and blame—creates distance in relationships.
Both positivity and negativity are forms of energy. Whichever you use more will grow within you. Negativity multiplies faster, while positivity grows steadily.
Our speech, nature, and behavior are the instruments through which we use these energies.
Positive speech and behavior bring humility. Negative speech and behavior bring hardness.
Positivity is meant to be given to others. The more positivity you give, the more it returns to you—many times over. Impact of energy on life.
Positive energy: Strengthens immunity, attracts happiness, peace, health, prosperity
Brings ease in work, Enhances beauty, smile, success, enthusiasm, name, fame, and wealth
Negative energy: Weakens immunity, creates obstacles, attracts sorrow, disease, poverty, stress, failure, and suffering. If you experience negativity in life, check which negative behavior you are practicing. Just as we avoid food that upsets our stomach, we must also give up negative behavior to achieve positivity.
Even destiny (birth chart) can be transformed by positive speech, nature, and behaviour.
Power of Small Words
Words like love, respect, faith, care, forgiveness may seem small, but they hold the power to create history. “Forgiveness” is a small word, yet it carries immense strength.
Key Words: Love, Appreciation, Positive Energy, Negative Energy.
Narayan Dhanyawad
Raj Didi Dhanyawad
Regards Mona Rauka 🙏



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