SESSION: 17th December, 2025 {SATSANG}
- Narayan Reiki Satsang Parivar Team

- Dec 17, 2025
- 5 min read

|| नारायण नारायण ||
17th December 2025 बुधवार सत्संग का सारांश । सत्संग आपके लिए राज दीदी के दैविक सत्संग के खजाने से लाया गया है।
राज दीदी ने इस सत्र की शुरुआत करते हुए कहा, नारायण कहते हैं कि 1 घंटे के मंत्र जाप से जो फल तुम्हें मिलेगा उससे कई गुना अधिक फलदाई होगा यदि तुमने अपने शब्दों के माध्यम से एक व्यक्ति के मन को ठंडक पहुंचा दी। तुम घंटे भर मंत्र जाप करती हो और उसके बाद चीखना, चिल्लाना ताने मारना यह सब करती हो तो यह मंत्र मुझ तक कैसे पहुंचेगा। मंत्र जाप से कई अधिक शक्तिशाली है तुम्हारे मुख से निकले हुए शब्द। तुम कहती हो कि तुम मेरे नजदीक बैठ कर मेरी आरती उतारना चाहती हो। आरती में तुम क्या गाती हो..?? जिस घर में तुम रहती सब सद्गुण आता, ओ मैया सब सद्गुण आता। सब संभव हो जाता, सब संभव हो जाता, मन नहीं घबराता। ओम जय लक्ष्मी माता। तुम बिन यज्ञ न होवे, वस्त्र न कोई पाता, ओ मैया वस्त्र न कोई पाता। खान पान का वैभव, खान पान का वैभव सब तुमसे आता। ओम जय लक्ष्मीमाता।
राज दीदी ने आगे कहा, नारायण कहते हैं कि कोई भी आरती, कोई भी चालीसा, कोई भी पाठ हो सभी में मेरा गुणगान किया हुआ है। तुम भी मेरा गुणगान करते हो, तुम जो मेरा गुणगान करते हो उसे मुझ तक पहुंचाने के लिए ताकत चाहिए, फोर्स चाहिए क्योंकि तुम नीचे रहती हो और मैं ऊपर रहता हूं। तुम्हारे भीतर सहनशक्ति हो, संतुष्टता हो, पवित्रता हो, अच्छाई, भलाई, करुणा हो। यह फोर्स चाहिए, यह गुण चाहिए तब जाकर तुम मेरा जो गुणगान करती हो वह मुझ तक पहुंचेगा। नारायण कहते हैं कि मेरा गुणगान करने के बजाएं तुम अपने माता-पिता का गुणगान करो, जिसने तुम्हें यह जीवन दिया और आज इस अवस्था तक पहुंचा दिया। परिवार के जो दूसरे सदस्य हैं जिनके भीतर जो भी गुण है उनके गुणों की तुम कदर करो, उनका गुणगान करो। माता-पिता के पास कभी थोड़ी देर बैठो, जरा सा उन्हें पूछ लो कि कैसे हो, कुछ चाहिए क्या..?? वह गदगद हो जाते हैं। जब उनके होठों पर मुस्कान हो, आंखें भीगी भीगी हो और आवाज भर्राई हुई सी हो तो गदगद अवस्था होती है। तुम्हारे किसी कार्य से यदि तुम्हारे माता-पिता खुश होकर गदगद होते हैं तो तुम्हारी घंटियों की आवाज मुझ तक पहुंच जाती है। मंदिर के पास बैठकर मेरा गुणगान करने से अधिक फलदाई है तुम्हारे इर्द गिर्द जो मेरी रचना है उनके गुणों का गान करो, उनके चेहरे पर मुस्कान लाओ। जब उनके चेहरे पर मुस्कान आती है मेरी घंटियां बजने लगती है। अन्यथा नारायण कहते हैं कि मैं जब किसी को घंटी बजाते सुनता हूं तो मैं विजिट पर रहता हूं।
राज दीदी ने आगे कहा, नारायण कहते हैं कि तुम कहती हो कि "नारायण मैं आपके नजदीक बैठकर आपकी सेवा करना चाहती हूं, भोग लगाना चाहती हूं।" तुम जो मंदिर के सामने भोग धरते हो पता नहीं वह मुझ तक पहुंचता है कि नहीं पहुंचता पर यदि घर के भीतर माता-पिता है, बड़े बुजुर्ग है यदि तुमने उनके समय पर उनकी पसंद का भोजन करा दिया और भोजन करने के बाद उनके चेहरे को ध्यान से देखना यदि तुम्हें वहां पर संतुष्टती नजर आई तो यह समझ लेना कि तुम्हारा लगाया हुआ 56 भोग मुझ तक पहुंच गया और मैंने पा लिया।
नारायण नारायण नारायण नारायण
राज दीदी ने आगे कहा, कि नारायण कहते हैं कि घर के सदस्यों को समय पर भोजन करा दिया वह सेवा मुझ तक पहुंचती है बजाएं तुम भोग को मंदिर में रखती हो। तुमने क्यों उस आधी घंटा, 1 घंटा की साधना के पीछे मन में भाव रखा है जबकि तुम्हें 24 घंटे की सेवा हाथों से और वाणी से दे रखी है ताकि तुम निरंतर मेरे संपर्क में रहो। विचारों के माध्यम से, वाणी के माध्यम से, कर्मों के माध्यम से।
राज दीदी ने आगे कहा कि गीतों में इतनी शक्ति होती है कि एक लाइन सारे उत्तर दे जाती है। "तुमको देखा तो यह ख्याल आया, जिंदगी धूप तुम घना साया," कितना सही अर्थ है। यदि एक व्यक्ति भी भीतर से यह गा देता है तो उसका जीवन सार्थक है, सार्थक है, सार्थक है।
मुख्य शब्द : माता-पिता की सेवा, विचार, वाणी, व्यवहार, कर्म, सप्त सितारा जीवन।
नारायण धन्यवाद
राज दीदी धन्यवाद
सादर सप्रेम सहित
स्वाति जोशी 🙏🙏
मलाड, मुंबई
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|| Narayan Narayan ||
The Summary of Divine Wednesday Satsang of 17 th December 2025. The Summary is brought to you from The Treasure box of Raj Didi's Divine Satsang.
Raj Didi began the session by saying that Narayan says —
The reward you get from one hour of mantra chanting is far less than the reward you get when your words bring peace to even one person’s heart. If after chanting you still shout, scold, or get angry, then how will that mantra ever reach Me.? Your spoken words are more powerful than your mantra.
Didi said —
You wish to sit near Me and perform My aarti. In the aarti you sing My glories. But to send those praises to Me, you need force — and that force comes from qualities like patience, contentment, purity, goodness, compassion. Unless these virtues are within you, your praises do not reach Me.
Narayan says —
Before praising Me, praise your parents who gave you life and brought you to this stage. Value the virtues of your family members. Sit with your parents for a while, ask how they are, ask if they need anything. When their eyes fill with tears of joy and a soft smile appears on their face — that is their state of being overwhelmed with love. When you create that joy in them, the sound of temple bells automatically reaches Me.
Narayan says —
You offer bhog to Me in the temple, but I may or may not receive it.
However, if you serve your parents' favourite meals on time, after eating that if you notice satisfaction on their face — then your offering of ‘56 bhog’ has definitely reached Me.
Narayan says -
Serving your family with food on time reaches Me more than placing bhog in the temple. Instead of depending only on half an hour or one hour of meditation, I have given you 24 hours of service — through your hands, your words, your thoughts — so that you remain constantly connected with Me.
Didi added —
Songs carry immense power. The line “Tumko dekha to yeh khayal aaya, zindagi dhoop tum ghana saaya,” expresses everything. If even one person can say this from the heart for you then your life becomes meaningful — truly fulfilled.
Key Words : Take care of your Parents, Thoughts, Words, Deeds, Karma, Seven Star Life.
Narayan Dhanyawad
Raj Didi Dhanyawad
Regards
Mona Rauka 🙏



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