SESSION: 03rd December, 2025 {SATSANG}
- Narayan Reiki Satsang Parivar Team

- Dec 3, 2025
- 12 min read

|| नारायण नारायण ||
3rd December 2025 बुधवार सत्संग का सारांश । सत्संग आपके लिए राज दीदी के दैविक सत्संग के खजाने से लाया गया है।
राज दीदी ने सत्र की शुरुआत करते हुए कहा कि आप लोग यदि इस बात पर विश्वास करते हैं कि हर माता-पिता अपने बच्चों को सर्वोत्तम देते हैं तो आपको इस बात पर भी विश्वास करना होगा कि वह परमपिता परमात्मा जो सर्व समर्थ है, उसने भी हमारा जीवन आशीर्वादों से, चमत्कारों से तथा कृपा से लबालब भर रखा है। लेकिन हमारा स्वभाव और व्यवहार जीवन में आने वाले आशीर्वादों को, हमारी ओर प्रवाह होती कृपा को, झोली में आते हुए चमत्कारों को रोक देता है। हम जाने-अंजाने ऐसा कुछ कर जाते हैं कि हमें यह समझ नहीं आता कि हमने जो किया वह गलत है, और तो और हम दूसरों से भी ग़लत करवाते हैं। इसके बाद आप लोग सवाल करते हैं कि हम इतनी प्रार्थना करते हैं उसके बावजूद भी वह हमारी सुनता क्यों नहीं है। जब आपका ईगो एक्टिवेट होता है तो आपको ऐसा लगता है कि हर बात आपके मुताबिक ही होनी चाहिए।
राज दीदी ने कहा कि आप लोग हर बात मैं दूसरों को पूछते हैं क्या.? हर बात दूसरों को बताते हैं क्या.?? जब आप लोग खुद नहीं करते हो तो दूसरों से कैसे उम्मीद कर सकते हो। आप लोग छोटी-छोटी बातों का इश्यू बना कर कहते हैं कि मेरी भी कोई सेल्फ रिस्पेक्ट है। आप लोगों को यह नहीं पता होता है कि यह आपका ईगो है। जिनके भीतर स्वाभिमान होता है, वे ना तो खुद के भीतर हलचल होने देते हैं और ना ही दूसरों को कहते हैं कि मुझे क्यों नहीं बताया, मुझसे क्यों नहीं पूछा।
राज दीदी ने आगे कहा की फेमस मंदिरों के दर्शन के लिए बहुत भीड़ होती है, पट खुलते ही भारी तादाद में लोगों का झुंड मंदिर के भीतर प्रवेश करता है। वैसे ही जब कोई चीज आपके प्रतिकूल होती है और आपका ईगो ट्रिगर होता है तो नकारात्मक विचारों का झुंड एक के बाद एक आपके मस्तिष्क में प्रवेश करने की कोशिश करता हैं। इसके बाद आप मुंह से जो भी बोलेंगे उसमें असहयोग का भाव रहेगा। जैसे ही आपके भीतर हलचल हुई वैसे ही सामने वाले के भीतर भी हलचल हो गई। जिसके घर शीशे के होते हैं वह दूसरों के घरों पर पत्थर नहीं फेंका करते, क्योंकि "वाटऐवर यू गिव, यू रिसीव।" अगर आपको कुछ अच्छा चाहिए तो यह ध्यान में रखिए कि यदि आप दूसरों को अच्छा दोगे तो ही आपको अच्छा मिलेगा अन्यथा नहीं मिलेगा। जब मस्तिष्क में नकारात्मक विचारों की भीड़ कैपेसिटी से ज्यादा बढ़ जाती है तो उसका प्रेशर आपकी जबान पर पड़ता है। इसका परिणाम यह होगा कि आप जो भी बोलोगे उसमें 'ना और नहीं होगा' ऐसे ही शब्दों का इस्तेमाल करोगे, तो आपकी वाणी में सहयोग का भाव नहीं रहेगा। आपके कांस्टेंट ना और नहीं शब्दों के प्रयोग से यह नेगेटिव एनर्जी जो कि बहुत स्ट्रॉन्ग है, आपके wishes पर जाकर बैठ जाती है। इस नेगेटिव एनर्जी की वजह से आपकी बॉडी अकड़ जाती है और जो इसमें से केमिकल रिलीज होते हैं उसका नेगेटिव इंपैक्ट आपके शरीर पर होता है। कभी-कभी बीपी शुगर की दवाई लेने के बावजूद भी आपका बीपी और शुगर बढ़ा हुआ ही दिखता है, इसकी वजह यह नेगेटिव ऊर्जा ही है। ईगो आपको हर्ट के अलावा और कुछ भी नहीं दे सकता है। जैसे नमक नमकीनता के अलावा और कुछ नहीं दे सकता है। यह पैकेज डील है जिसे आप आकर्षित करते है। आपको ईगो आएगा तो वो आपके पास hurt अपने साथ में लेकर ही आएगा। आपने यदि ईगो को आने से रोक दिया तो hurt आपके पास नहीं आएगा। शरीर में चोट लगती है तो उसका घाव भर जाता है लेकिन ईगो का घाव बरसों-बरसों तक जीवित रहता है। जब तक आपका शरीर सही सलामत चल रहा है तब तक ही ईगो आपके पास रहता है। चाहे आपके पास धन और बाकी चीजें भी है, फिर भी ईगो को अट्रैक्ट नहीं कर पाओगे क्योंकि उस धन को तो आप भोग ही नहीं पाओगे। खुद का ईगो हमें नहीं समझ में आता है लेकिन सामने वाले का ईगो एक्टिवेट हो गया है यह हमें जब समझ जाता है तो हमें यह ध्यान रखना चाहिए कि उसके छिटें हम पर ना पड़े। आप सोचते हैं कि सामने वाला अड़ रहा है तो मैं भी अडुंगी। अड़ने मैं ताकत नहीं चाहिए, झुकने में ताकत चाहिए। यदि कोई व्यक्ति अड़ा हुआ है तो उस वक्त आपको विनम्र रहना चाहिए क्योंकि प्रकृति हर चीज का इशारा करती है। सामने वाले के ईगो को शांत करने का एक ही तरीका है, आप उनसे कह दीजिए कि आई एम वेरी वेरी सॉरी। जब तक सामने वाला शांत नहीं होता तब तक हमें उसे सॉरी बोलते रहना है। कई बार हम लोग कहते हैं कि "हमें टेकन फॉर ग्रांटेड" लिया जा रहा है। लेकिन टेकन फॉर ग्रांटेड जैसा कोई शब्द है ही नहीं, हमारे ईगो ने बनाया है इसे। हम अपने बच्चों को भी तो कहते हैं ना कि यदि तू जरा सा झुक जाता तो क्या होता। जो चीज हम अपने बच्चों को सिखाते हैं वह हम अपने जीवन में भी अप्लाई कर ले तो कितना अच्छा होगा। हमारा भी कल्याण हो जाएगा और हमें देख देखकर हमारे बच्चों का भी कल्याण हो जाएगा।
राज दीदी ने आगे कहा कि मैंने हाल ही में कुमार विश्वास का एक वीडियो देखा, उसमें उन्होंने कहा कि मेरे पिताजी 84 साल के हैं, अभी भी जब उनका फोन आता है तो मैं मेरी सीट से खड़ा होकर आदर पूर्वक उनसे बात करता हूं, इसका अर्थ यह नहीं है कि मैं उनसे डरता हूं। उन्होंने कहा कि मैं ऐसा इसलिए करता हूं कि मेरे बच्चे मुझे देख रहे हैं कि मैं किस तरीके से अपने माता-पिता से व्यवहार करता हूं। यदि मैं यह चाहता हूं कि मेरे बच्चे भी मुझसे अच्छे से व्यवहार करें तो मुझे उन्हें यह एक्शंस के द्वारा बताना होगा, मुंह से बोल-बोल कर कोई नहीं सीख पाएगा।
राज दीदी ने आगे कहा कि हमें एक और चीज ध्यान रखनी होगी कि जब जीवन में सब कुछ अच्छें तरीके से चल रहा हो और हमारे मुख से कदम-कदम पर निकलता है कि ईश्वर की बहुत कृपा है, तो विपरीत परिस्थितियों में भी उसकी कृपा की अनुभूति करने की शुरुआत कर दीजिए। ना ही मैं मेरे भीतर हलचल लाऊंगा ना ही किसी और के भीतर क्योंकि मैंने यूनिवर्स में शांति और सहयोग डिपॉजिट कर रखा है। सिर्फ पैसा ही डिपाजिट नहीं होता है, आपकी हर चीज ब्रह्मांड में डिपॉजिट होती है और समय रहते आप तक पहुंच जाती है। आप withdraw करो या ना करो, वह अपने आप, आप तक पहुंचा देता है। हलचल डिपाजिट है तो हलचल और शांति डिपाजिट है तो शांति। आपने जो भी डिपॉजिट किया है वह आपको अवश्य ही मिलेगा।
शेयरिंग : १ दीदी आपने कई बार कहा है कि हमें अपने सास-ससुर की सेवा करनी चाहिए। दीदी मैं उनकी बात सुनती हूं, मानती भी हूं। उन्हें फाइनेंशियली बहुत ज्यादा दिक्कत हो रही थी तो मैंने प्रार्थना की कि मुझे नई नौकरी मिल जाए। फिर मुझे नई नौकरी मिली और मेरी सैलरी काफी बढ़ गई थी। उनके मेडिकल एक्सपेंस बहुत ज्यादा हो रहे थे तो मैं उनकी हेल्प कर रही थी। ऐसे में मेरे में प्राइड आ गया था कि आज मैं जॉब कर रही हूं इसलिए मैं हेल्प कर पा रही हूं और उनकी सेवा हो रही है। मैं और मेरे पति इस चीज की बहुत चर्चा करते थे। आज स्थिति ऐसी है कि मेरी वह जॉब जाने वाली है और मेरे सास-ससुर भी नारायण धाम चले गए हैं। मुझे लगता है कि मेरे प्राइड के वजह से ही मेरी नौकरी जा रही है। मैं नारायण से और यूनिवर्स से भी माफी मांगती हूं, मॉम-डैड से भी माफी मांगती हूं। सभी से मैं यह निवेदन करती हूं कि आप सेवा कर रहे हो तो कभी भी प्राइड मत आने देना क्योंकि उसका नतीजा ठीक नहीं होता है। मैं उनके आशीर्वादों के वजह से ही अच्छें से पैसा कमा रही थी, वह मेरी मेहनत नहीं थी, मैं तो उनके लिए बस एक माध्यम थी।
इस पर राज दीदी ने कहा कि उस महिला को उनके सास ससुर के आशीर्वाद से ही बहुत अच्छी जॉब मिली थी ताकि वह उनकी मदद कर सके। जैसे ही अभिमान आया वैसे ही कृपा चली गई।
शेयरिंग : २ एक महिला ने कहा कि मैं घर का काम बहुत किया करती थी। वह महिला सारे दिन सबको सुनाती रहती थी कि सारा काम मैं करती हूं, मैं करती हूं। आज उनके दोनों हाथों में फ्रोजन शोल्डर है।
इस पर राज दीदी ने कहा, अब करके दिखाओ काम.!! ईगो मत लाइए, दूसरों को मत सुनाइए। आप काम मत कीजिए, आप पीछे हट जाइए और काम कैसे नहीं होता है देख लीजिए गा। आपसे बेहतर ही होगा काम, यह भी निश्चित है। हमें काम करने मिल रहा है और हमारे शरीर से काम हो पा रहा है तो इसमें उसकी कृपा है, इसमें अपने ईगो से तनियें मत।
शेयरिंग : ३ एक महिला ने कहा कि मेरी नई-नई शादी हुई थी और नया बिजनेस करने के लिए मेरे हस्बैंड को मेरे पिताजी से पैसों की मदद लेनी पड़ी थी। इस चीज के लिए मैं बहुत घमंड करती थी कि मेरे पापा ने इन्हें फाइनेंशियली हेल्प की है, मैं हर किसी को इस बारे में बताती थी। इसका परिणाम यह है कि मेरी बेटी को भी शादी के बाद आज हमसे फाइनेंशियली हेल्प लेनी पड़ रही है।
इस पर राज दीदी ने कहा कि सुन लिया घमंड करने का परिणाम। जो आप कहोगे वह रिपीट होकर आपके पास ही वापस आने वाला है।
शेयरिंग : ४ एक महिला ने कहा कि वह इस बात पर गर्व करती थी कि घर के लिए कोई भी सामान लेने जाते तो वह उसके क्रेडिट कार्ड से पेमेंट करती थी क्योंकि उसके हस्बैंड का क्रेडिट कार्ड वर्क नहीं करता था। सभी इन्वेस्टमेंट्स उस महिला के क्रेडिट कार्ड से ही होते थे। दीदी मैं तब तक आपसे जुड़ी नहीं थी। मैं मेरे हस्बैंड को कहती थी कि देखो मेरी छोटी सी सैलरी है लेकिन फिर भी घर की जरूरतो के लिए मेरा ही अकाउंट इस्तेमाल होता है, इस चीज का मुझे गर्व था। इसका परिणाम यह हुआ कि वह शहर छोड़ कर मुझे दूसरे शहर में आना पड़ा। मेरी नौकरी भी नहीं रही और पुरानी नौकरी के पीएफ का अमाउंट भी मुझे अभी तक नहीं मिला है।
इस पर दीदी ने कहा यह ध्यान रहे की शास्त्र सिर्फ इशारा करता है, घमंड तो रावण का भी नहीं टिका था जबकि वह तो बहुत ही विद्वान था, परम ज्ञानी था। हम तो साधारण लोग हैं, किस बात पर गर्व कर रहे हैं..?? यह अपॉर्चुनिटी आपको नारायण की कृपा से ही मिली थी। नारायण नारायण!!
राज दीदी ने आगे कहा कि आप घमंड किस चीज पर करते हैं..?? जो चीज भी आपके जीवन में दूसरों की तुलना में अतिरिक्त है। चाहे अच्छा घर हो, चाहे रूप-रंग हो, चाहे एक्टिंवनेस हो, चाहे कोई वस्तु हो, गाड़ी हो, बंगला हो। जिन चीजों पर भी आप गर्व करते हैं, इसका असर आपकी चाल और वाणी में दिखाई देने लगता है। जिस चीज पर आपने गर्व किया वह चीज आपके पास धीरे-धीरे कम होती चली जाती है। जो लोग नियमित रूप से ब्रह्म मुहूर्त की प्रार्थनाओं से जुड़े हुए हैं उन सभी लोगों ने ऐसे एक्सपिरिएंस बहुत बार सुन लिए है। गर्व किया वही चीज उसके हाथ से चली गई।
राज दीदी ने एक एग्जांपल् देते हुए समझाया। आप सोचिए कि सपोज कोई विद्यार्थी टॉप रैंक लेकर आया हो। रिजल्ट आने से पहले जब आप उससे बात करते हो तो बारंबार वह यही कहता है की बस में पास हो जाऊं। जैसे ही वह बच्चा टॉप आ गया और आपने उसे यह पूछा कि क्या तुम्हें पता था की तुम टॉप आने वाले हो, उसका जवाब यही होगा कि मैं तो कल्पना ही नहीं कर सकता था कि मैं टॉप आऊंगा। आज तक ऐसा कभी भी नहीं हुआ है कि किसी ने डंके की चोट पर कहा हो कि मेरे सारे पेपर अच्छे गए हैं, मैं फर्स्ट आऊंगा और वह फर्स्ट आ गया हो। जैसे ही आपने कहा कि ईश्वर की बहुत कृपा है, शरीर स्वस्थ है, जो भी संसाधन मिला है वह ईश्वर की कृपा से ही मिला है, तो इसमें बढ़ोतरी होती चली जाती है। जितना आप झुक कर आभार प्रकट करते जाएंगे उतना ही आपके जीवन में बरकत बढ़ोतरी का साइज बढ़ता चला जाएगा। आपके भीतर जो भी ईगो है उसे छोड़कर आगे बढ़ाना है, विनम्रता साथ में लेकर जाना है, झुकना सीखना है। इस वाक्य को यही भूल जाइए कि "मुझे टेकन फॉर ग्रांटेड लिया जाता है।" मैं सबका करती हूं इसलिए मुझे ही सुनना पड़ता है और मुझे ही करना पड़ता है, ऐसी धारणा मत बनाइए। यू आर एलिजिबल, आपको चुना है उसने करने के लिए। जब तक वह चुनता है तब तक आपकी हेल्थ को भी वह सही रखता है ताकि आप वह काम करते रहे। ध्यान रहे कि जिस दिन आप अड़ते है तो सबसे पहले आपकी हेल्थ पर असर पड़ता है।
मुख्य शब्द : विनम्रता, ईगो, आभार प्रकट करना, प्रचुरता।
नारायण धन्यवाद
राज दीदी धन्यवाद
सादर सप्रेम सहित
स्वाति जोशी 🙏🙏
मलाड, मुंबई
|| Narayan Narayan ||
Satsang Summary of 3rd December 2025. This Satsang has been brought to you from the Divine Treasure of Raj Didi’s teachings.
Raj Didi began the session by saying that if we believe that every parent always gives the best to their children, then we must also believe that the Supreme Father, who is all-powerful, has also filled our lives with blessings, miracles, and grace. But our nature and behaviour block these blessings, miracles, and the flowing grace. Often unknowingly, we do things that are wrong, and we don’t even realise it—and sometimes we make others do the same. Later we ask, “Why does God not listen to me even after I do so much.?” When your EGO gets activated, you start feeling that everything must happen exactly according to you. Didi asked, “Do you ask others before doing everything.? Do you always inform them.?” If you do not, how can you expect others to do so.? Many times we say, “I also have self-respect”—but that is actually ego.
Real self-respect is silent. It neither creates inner disturbance nor blames others for not consulting or informing us. Ego creates negative crowds of thoughts.
Didi said that when the doors of a famous temple open, a huge crowd rushes in. Similarly, when something goes against your wishes and your ego gets triggered, a crowd of negative thoughts rushes into your mind. Whatever you speak afterwards will carry the vibration of non-cooperation.
When your mind is filled beyond capacity with negative thoughts, the pressure reaches your tongue, and your words become full of “no” and “not”. This strong negative energy settles on your wishes, blocking their fulfilment. This negative energy also impacts your body—your body stiffens, chemicals released create harmful effects, and even with medication, BP or sugar remain high. Ego can only bring hurt, just like salt can only give saltiness. Ego is a package deal—ego always brings hurt with it. If you stop ego from arising, the hurt will also not come. Physical wounds heal, but ego-wounds can stay alive for years.
How to deal with others’ ego. We never recognise our own ego, but we easily notice others’ ego. When you see someone’s ego activate, you must ensure that its “sparks” do not fall on you. It requires no strength to stand rigid; the real strength is in bending with humility.
The only way to calm someone else's ego is to say : “I am very, very sorry.” Keep saying it until the other person calms down. We often say, “People take me for granted,” but “taken for granted” is a word created by EGO. We teach our children to bend a little—if we apply this on ourselves, our life and our children’s lives improve. Kumar Vishwas’ example
Didi shared a video where Kumar Vishwas said his father is 84 years old, yet whenever he calls, he stands up out of respect. Not because he fears him, but because his children observe how he treats his parents. He wants them to learn from his actions, not words.
Remember God’s Grace in good and bad times. When life is going well, we easily say, “God is very kind.”
But start feeling His Grace even in difficult situations. Whatever we deposit in the Universe—peace or disturbance—comes back to us naturally. You may not withdraw it, but it still reaches you. If you deposited disturbance, you will receive disturbance; if you deposited peace, you will receive peace.
Sharing 1 — Pride and losing blessings.
A lady said she prayed for a job to support her in-laws. She got a high-salary job and supported them financially. But slowly pride entered her heart—“I am earning, so their service is happening because of me.” After her in-laws passed away, she lost her job. She realised her pride was the cause. She said, “While serving, one must never take pride. The consequences are not good.”
Didi explained that the lady got the job through her in-laws’ blessings so she could serve them. When pride came, the Grace withdrew.
Sharing 2 — Frozen shoulder.
A woman always bragged, “I do all the work, everything is done by me.” Today she has a frozen shoulder in both hands.
Didi said : now show how you will work.!
Don’t create EGO through work. If you stop doing your work, others will still manage it—maybe even better.
If your body is able to work, it is His Grace—donot stretch it with EGO.
Sharing 3 — Pride about the father’s financial help.
A newly married woman felt proud that her father helped her husband financially in Business. She told everyone about it.
Today, after her daughter’s marriage, she herself has to help her daughter financially. What you boast about comes back to you.
Sharing 4 — Pride about salary and credit card.
Another woman said she felt proud that household expenses were paid through her credit card since her husband’s card didn’t work. Later she had to leave the city, lost her job, and even her PF is still not received. She said she did not realise it was all God’s Grace at that time. EGO reduces whatever you boast about.
Didi said the scriptures clearly warn that even Ravana's pride didn’t survive—and he was supremely knowledgeable. Anything you feel proud of—looks, wealth, house, car, intelligence—slowly starts decreasing. People who attend Brahma-muhurta prayers know that anything you boast about slips away.
Didi gave an Example : A student never proudly claims before result that he will top. After topping, he says, “I never imagined I would top.” When you keep saying “God’s Grace is upon me,” abundance increases. The more you bow down with Gratitude, the more your life Prospers. Drop ego, pick humility, stop thinking “I am taken for granted.” If you are doing a lot, it means - He has chosen you. If He has chosen you, he will also take care of your health — until the day you start becoming rigid. The moment rigidity begins, health is the first thing that gets affected.
Key words : Humility, Ego, Gratitude, Abundance.
Narayan Dhanyawad
Raj Didi Dhanyawad
Regards
Mona Rauka 🙏



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